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Chapter 1 - आखिरी चिट्ठी (The Last Letter)

रात के ठीक बारह बज रहे थे।

पूरा शहर बारिश की आवाज़ में डूबा हुआ था। आसमान में चमकती बिजली हर कुछ सेकंड बाद अंधेरे कमरे को सफेद रोशनी से भर देती और फिर सब कुछ पहले जैसा शांत हो जाता।

आरव अपने छोटे से किराए के कमरे में लैपटॉप बंद करके बिस्तर पर लेटने ही वाला था। पूरे दिन नौकरी की तलाश में भटकने के बाद उसके पास थकने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।

तभी...

ठक... ठक... ठक...

दरवाजे पर तीन धीमी दस्तक हुई।

आरव ने घड़ी की तरफ देखा।

12:00 AM

वह कुछ पल चुप खड़ा रहा। इतनी रात को कौन हो सकता है?

उसने धीरे से दरवाजा खोला।

बाहर कोई नहीं था।

बस फर्श पर एक पुराना सफेद लिफाफा रखा था।

लिफाफे पर लाल स्याही से सिर्फ एक नाम लिखा था—

"आरव"

उसका दिल तेजी से धड़कने लगा।

उसने आसपास देखा। गली पूरी तरह खाली थी। बारिश लगातार हो रही थी।

वह लिफाफा उठाकर कमरे में आया और उसे खोला।

अंदर एक पीला कागज था, जिस पर केवल एक लाइन लिखी थी—

"अगर कल सुबह 10 बजकर 15 मिनट पर तुम बस स्टैंड नहीं पहुंचे, तो एक मासूम हमेशा के लिए इस दुनिया से चला जाएगा।"

आरव हंस पड़ा।

"किसी का घटिया मजाक है।"

उसने चिट्ठी मेज पर फेंकी और सो गया।

लेकिन पूरी रात उसे बार-बार वही शब्द याद आते रहे।

सुबह अलार्म की आवाज़ से उसकी आंख खुली।

मोबाइल में समय था—

9:52 AM

वह तैयार होने लगा, लेकिन अचानक उसकी नजर मेज पर रखी चिट्ठी पर पड़ी।

उसके कदम रुक गए।

"क्या सच में जाना चाहिए?"

उसने खुद को समझाया कि यह सिर्फ एक मजाक है।

फिर भी उसके मन में अजीब बेचैनी थी।

आखिरकार उसने जैकेट पहनी और तेज कदमों से बस स्टैंड की तरफ चल पड़ा।

बारिश अभी भी जारी थी।

घड़ी में 10 बजकर 13 मिनट हो चुके थे।

बस स्टैंड पर रोज की तरह भीड़ थी।

कोई ऑफिस जा रहा था, कोई स्कूल।

उसी समय उसकी नजर एक सात-आठ साल की छोटी बच्ची पर पड़ी।

वह हाथ में गुब्बारा पकड़े सड़क पार कर रही थी।

अचानक...

एक तेज रफ्तार ट्रक मोड़ से उसकी तरफ बढ़ा।

लोग चिल्लाने लगे।

"बचाओ...!"

आरव बिना सोचे दौड़ा।

उसने पूरी ताकत से बच्ची को धक्का दिया।

बच्ची सड़क के किनारे गिर गई और सुरक्षित बच गई।

लेकिन आरव खुद सड़क पर गिर पड़ा।

ट्रक उसके बिल्कुल पास से निकल गया।

कुछ सेकंड के लिए पूरा माहौल शांत हो गया।

फिर लोगों की भीड़ जमा हो गई।

बच्ची रोते हुए अपनी मां से लिपट गई।

आरव ने राहत की सांस ली।

तभी भीड़ के पीछे खड़ा एक बूढ़ा आदमी धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ा।

उसकी सफेद दाढ़ी भीग चुकी थी।

आंखों में अजीब डर था।

वह आरव के बिल्कुल पास आया और कांपते हाथ से उसकी हथेली पकड़ ली।

उसने अपनी जेब से एक पुरानी जंग लगी चाबी निकाली।

धीरे से आरव के हाथ में रखते हुए बोला—

"तुमने पहली परीक्षा पार कर ली..."

आरव हैरान रह गया।

"आप कौन हैं?"

बूढ़ा आदमी उसकी आंखों में देखते हुए बोला—

"आज रात दूसरी चिट्ठी आएगी... लेकिन उसे पढ़ना मत..."

इतना कहकर वह अचानक जमीन पर गिर पड़ा।

लोग उसकी तरफ दौड़े।

किसी ने नब्ज देखी।

फिर धीमी आवाज़ में कहा—

"इनकी मौत हो चुकी है..."

आरव के हाथ कांपने लगे।

उसी समय उसके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया।

उसने स्क्रीन खोली।

उस पर लिखा था—

"तुमने एक जान बचाई है। अब तुम्हारी बारी है।"

नीचे एक और लाइन चमक रही थी—

"आज रात ठीक 12 बजे दरवाजा मत खोलना... क्योंकि इस बार चिट्ठी देने वाला इंसान नहीं होगा..."

आरव के चेहरे का रंग उड़ गया।

उसने घड़ी की तरफ देखा।

बारिश पहले से भी तेज हो चुकी थी।

और दूर कहीं...

काले कपड़ों में खड़ा एक अनजान आदमी उसे लगातार देख रहा था।

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