यह कहानी है हर्ष ओर राधिका की | यह एक एसी प्रेम कहानी है जिसमे शब्द का कम अहसास जायदा हुआ है |
* मोन का अहसास
हर्ष ओर राधिका एक ही कॉलेज मे पढ़ते थे | हर्ष सव्भाव से शांत ओर अंतमुर्खी था, जबकि राधिका चंचल ओर हर दिल अजीज | हर्ष के लिए राधिका सिर्फ एक सहपाठी नहीं थी; वह उसके लिए वह सवेरा थी जिसे वह हर रोज चुपचाप निहारता रहता था | हर्ष का प्यार एकतरफा था, लेकिन वह इसे अधूरा नहीं मानता था | उसके लिए राधिका का मुसकुराना ही उसके दिन की सबसे बड़ी उपलब्धि होती थी |
* वो अनकही बाते
अर्श अक्सर लाइब्रेरी के उसी कोने मे बट्टा जहा से राधिका साफ दिखाई दे | वह उसे पढ़ते हुये देखता, उसे अपनी सहेलियों के साथ बाते करते हुए देखता | उसने कई बार सोचा की जाकर कह दे "राधिका तुम मेरी दुनिया हो " लेकिन फिर उसे खोने के डर से अपने सबदों को एमएन मे ही रोककर उससे देखता रहता उसे डर था की अगर उसने अपनी भावनाए जाहीर की तो सायद वह राधिका के साथ बिताए हुये वे सारे छोटे-छोटे पालो को भी खो देगा - जैसे कभी किसी नोट्स को मांगा या कभी केंटीन मे टकरा जाने पर एक हल्की मुस्कुराहट का मिलना |
* बारिश ओर विदाई
कॉलेज का आखिरी दिन था | आसमान हल्की बारिश हो रही थी, मानो हर्ष के मन की उदशी को प्रकर्ति साझा कर रही हो | सब एक-दूसरे को अलविदा कह रहाई थे, फोटो खिचवा रहै थे | हर्ष एक कोने मे खड़ा राधिका को देखरहा था | आज राधिका बहोत खुश थी, क्योकि उसे विदेश की एक बड़ी उनीवसृति मे दाखिल मिल गया था |
हर्ष के हाथ मे एक छोटी सी डायरी थी,जिसमे उसने पिछले तीन वर्षो मे राधिका के लिए लिखी गई नजमे ओर यादे सँजोई थी | उसने सोचा था की आज वह इसे राधिका को दे देगा | वह उसके पास गया भी, पर जब उसने राधिका की आखो मे अपने भविशे को लेकर चमक देखि, तो उस्न्बे अपने कदम पीछे हटलिए | उसे लगा की उसका इकरार काही राधिका की इस खुसी को आड़े न आ जाए |
* एक खूबसूरत अधूरापन
राधिका अपनी गाड़ी की ओर बढ़ी थोड़ा आगे चलने के बाद उसने पीछे मुड़कर देखा उसे असा महाशूस हुआ की उसे किसी ने आवाज दी हो जैसे ही उसने पीछे मुड़के देखा उसकी नजर हर्ष की ओर पड़ी फिर वह उसके पास गई ओर बोला की हर्ष अपना खयाल रखना | तुम बहोत अछे इंसान हो, शायद ही कोई तुम्हारी तरह खामोशी मे साथ देना जनता हो |" उसने हर्ष के हाथ पर एक छोटा सा गुड बाए लेटर रखा ओर चली गई |
हर्ष वही खड़ा रहा | उसने अपनी डायरी नहीं दी, न ही अपने दिल की बात कही | उसे अहसास हुआ की प्यार का मतलब हमेशा प लेना नहीं होता | कभी-कभी किसी की खुशी के लिए खुद को पीछे रख लेना भी सबसे गहरा प्यार होता है |
*भाग 1 समाप्त आगे की कहानी भाग 2 मे .....
