बंद कमरा
रात का समय था। हवेली के अंदर घना सन्नाटा पसरा हुआ था। बाहर हवा तेज़ चल रही थी और टूटी खिड़कियों से आती हुई हवा की आवाज़ पूरे घर में गूँज रही थी।
अमन, रोहित, कविता, राहुल और सीमा धीरे-धीरे सीढ़ियाँ चढ़ रहे थे। उनकी टॉर्च की हल्की रोशनी दीवारों पर पड़ रही थी। हर कदम के साथ उनके दिल की धड़कन तेज़ होती जा रही थी।
सीढ़ियों के ऊपर पहुँचते ही उन्हें एक लंबा गलियारा दिखाई दिया। गलियारे के आखिर में एक पुराना लकड़ी का दरवाज़ा था।
दरवाज़े पर धूल जमी हुई थी और उस पर बड़े अक्षरों में लिखा था—
"इस दरवाज़े को मत खोलना।"
सीमा ने धीरे से कहा,
"मुझे लगता है हमें यहाँ से वापस चलना चाहिए।"
लेकिन राहुल ने हँसते हुए कहा,
"इतनी दूर आए हैं तो देख कर ही जाएंगे।"
उसने दरवाज़े को धक्का दिया।
दरवाज़ा धीरे-धीरे खुलने लगा।
"चूँऽऽऽ…"
जैसे ही दरवाज़ा खुला, अंदर से बहुत ठंडी हवा बाहर आई। ऐसा लगा जैसे कमरे के अंदर कई सालों से सूरज की रोशनी नहीं पहुँची थी।
कमरे के अंदर एक पुरानी लकड़ी की कुर्सी रखी थी और चारों तरफ टूटी हुई मेज़ें और अलमारियाँ पड़ी थीं।
लेकिन सबसे अजीब चीज़ दीवार पर बनी हुई थी।
दीवार पर लाल रंग से अजीब-अजीब चिन्ह बने हुए थे।
कविता ने डरते हुए पूछा,
"ये किसने बनाया होगा?"
अमन कुछ बोलने ही वाला था कि अचानक…
दरवाज़ा जोर से बंद हो गया।
"धड़ाम!"
अब सब लोग कमरे के अंदर फँस चुके थे। pm – अजीब परछाई
दरवाज़ा बंद होते ही सब घबरा गए।
रोहित ने जल्दी से दरवाज़ा खोलने की कोशिश की लेकिन दरवाज़ा हिल भी नहीं रहा था।
सीमा की आवाज़ काँप रही थी।
"हम… हम यहाँ फँस गए हैं क्या?"
अमन ने कहा,
"घबराओ मत… शायद दरवाज़ा जाम हो गया है।"
तभी अचानक टॉर्च की रोशनी दीवार पर पड़ी।
और सबकी नज़र एक चीज़ पर जाकर रुक गई।
दीवार पर एक बहुत बड़ी परछाई दिखाई दे रही थी।
लेकिन अजीब बात यह थी कि कमरे में उस परछाई का मालिक कोई नहीं था।
परछाई धीरे-धीरे हिल रही थी।
मानो कोई अदृश्य इंसान वहाँ खड़ा हो।
राहुल धीरे-धीरे पीछे हटने लगा।
तभी अचानक…
ऊपर की छत से किसी के चलने की आवाज़ आई।
"ठक… ठक… ठक…"
सब लोग डर के मारे चुप हो गए।
– पहली चीख
हवेली के अंदर अचानक एक डरावनी आवाज़ गूँजी।
"बचाओ…"
यह किसी लड़की की चीख थी।
आवाज़ ऊपर की मंज़िल से आ रही थी।
कविता घबरा गई।
"यह आवाज़… किसी लड़की की है!"
अमन ने कहा,
"हमें देखना चाहिए।"
लेकिन रोहित ने तुरंत मना किया।
"नहीं… यह ठीक नहीं है। यह जगह सही नहीं लग रही।"
तभी अचानक कमरे की लाइट जैसी चमक हुई।
और एक पल के लिए उन्हें ऐसा लगा जैसे दरवाज़े के पास कोई खड़ा है।
एक बूढ़ा आदमी।
उसका चेहरा बहुत डरावना था।
लेकिन अगले ही पल वह गायब हो गया।
अब सबको समझ आ गया था कि इस हवेली में कुछ बहुत अजीब और खतरनाक है।
और शायद…
वे यहाँ अकेले नहीं थे।
अगर तुम चाहो तो मैं अगले चैप्टर भी इसी तरह लंबे और ज्यादा डरावने लिख सकता हूँ:please comment
